ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों की निंदा को लेकर ब्रिक्स की संयुक्त प्रतिक्रिया पर सहमति बनाना मुश्किल हो गया है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, समूह के कुछ सदस्य देश पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष में सीधे शामिल हैं. हालांकि, भारत ने कहा है कि वह ब्रिक्स देशों के साथ बातचीत जारी रखेगा.
नई दिल्ली में ब्रिक्स 2026 के शेरपा और सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के शामिल हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईरान पर अमेरिका व इज़रायल के हमलों को लेकर ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिक्रिया तैयार करने के संबंध में शनिवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘इस मुद्दे पर ब्रिक्स के भीतर सहमति बनाना कठिन हो गया है, क्योंकि समूह के कुछ सदस्य देश मौजूदा संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं.
’ यह बयान ऐसे समय आया है जब दो दिन पहले ईरान ने भारत से अपील की थी कि वह ब्रिक्स की ओर से अमेरिका और इज़रायल के हमलों की निंदा करते हुए एक संयुक्त बयान जारी करने में पहल करे.के साथ फोन पर हुई बातचीत में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा था कि यदि भारत ‘ईरान का मित्र’ है, तो ब्रिक्स को बढ़ते संघर्ष से निपटने में ‘मजबूत’ और ‘रचनात्मक’ भूमिका निभानी चाहिए. इसके बाद शनिवार को विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा, ‘ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश पश्चिम एशिया क्षेत्र की मौजूदा स्थिति में सीधे तौर पर शामिल हैं, जिसका असर जारी संघर्ष पर ब्रिक्स की साझा स्थिति के लिए सहमति बनाने की प्रक्रिया पर पड़ा है. ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में भारत शेरपा चैनल के माध्यम से सदस्य देशों के बीच चर्चा को आगे बढ़ा रहा है.’ उन्होंने बताया कि ब्रिक्स शेरपा की पिछली वर्चुअल बैठक 12 मार्च को हुई थी. इसके अलावा भारत का नेतृत्व क्षेत्र के ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं के साथ भी बातचीत कर रहा है और यह संवाद आगे भी जारी रहेगा. बता दें कि शेरपा चैनल, कूटनीति में वह आधिकारिक माध्यम होता है जिसके जरिए किसी शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि आपस में बातचीत करते हैं और सहमति बनाने की कोशिश करते हैं. सरल शब्दों में कहें तो हर देश एक ‘शेरपा’ नियुक्त करता है. यह व्यक्ति आमतौर पर प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का वरिष्ठ दूत/अधिकारी होता है. ये शेरपा नेताओं की बैठक से पहले एजेंडा, बयान, और समझौतों के मसौदे तैयार करने में भूमिका निभाते हैं. इन्हीं अधिकारियों के बीच होने वाली बातचीत को ‘शेरपा चैनल’ कहा जाता है.यह स्थिति पिछले साल से अलग है. 2025 में ब्राज़ील की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने जून 2025 में ईरान पर इज़रायल के हमलों को लेकर दो बयान जारी किए थे. 12 दिन तक चले उस युद्ध के दौरान 25 जून को जारी पहलेमें कहा गया था कि ’13 जून 2025 से इस्लामी गणराज्य ईरान पर हुए सैन्य हमलों को लेकर हमें गहरी चिंता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं.’ भारत भी इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में शामिल था. वहीं, इस साल अब तक भारत ने संयुक्त अरब अमीरात सहित गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के देशों पर ईरान के हमलों की निंदा की है, लेकिन ईरान पर अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए शुरुआती हमलों की औपचारिक आलोचना नहीं की है. वहीं ब्रिक्स के अन्य संस्थापक देशों ने अलग-अलग अमेरिका और इज़रायल के इन हमलों की निंदा की है.ब्रिक्स समूह में मूल रूप से ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे. बाद में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी शामिल हो गए. सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी सैन्य अड्डे और सैनिक मौजूद हैं और हाल के दिनों में इन देशों को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों का निशाना भी बनाया गया है. इन देशों के भी ब्रिक्स में होने के कारण भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन बनाना और जटिल हो गया है. भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहा है और इसी साल ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करने वाला है. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दो हफ्तों में सऊदी अरब, यूएई और ईरान – तीनों ब्रिक्स सदस्य देशों – के नेताओं से बातचीत की है. विदेश मंत्री जयशंकर ने भी इन देशों के अपने समकक्षों के अलावा रूस के विदेश मंत्री से बातचीत की है. शुक्रवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में जयशंकर ने कहा था कि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर भारत सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के संपर्क में है.है, क्योंकि इसमें दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं. ये देश मिलकर वैश्विक आबादी का लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी का करीब 40 प्रतिशत और दुनिया के लगभग 26 प्रतिशत व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं.hindi@thewire.inनॉर्थ ईस्ट डायरीः मणिपुर में एनआरसी की मांग को लेकर प्रदर्शन, मेघालय में हिंसा के बीच हिल काउंसिल के चुनाव टले राही मासूम रज़ा के नाम मनोज कुमार झा का ख़त: ‘आपकी याद हमें यह सिखाती है कि प्रतिरोध हमेशा नारा नहीं होता’दिल्ली में दो मज़दूर अधिकार कार्यकर्ता और छह छात्रों समेत कई लोग ‘उठाए’ गए, अब तक लापता: छात्र संगठन का आरोप




